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सीकर जिले के रैवासा स्थित
प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर से चांदी के छत्र व अष्टधातु की मूर्तियां चोरी
रैवासा/सीकर, December 25, 2011: सीकर जिले के
रैवासा स्थित प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर से गुरुवार रात लाखों के चांदी के छत्र मूर्तियां व
सिंहासन सहित अष्टधातु की बेशकीमती मूर्तियां चोरी कर ली गईं। शुक्रवार सुबह जब मंदिर का सेवक आया तो
वारदात का पता चला। सूचना पर पुलिस अधिकारी मौके पर
पहुंचे और नागौर व झुंझुनूं से एफएसएल टीम बुलाकर जांच की।
वारदात में एक ही आरोपी शामिल होने की बात सामने आ
रही है। पुलिस के मुताबिक रैवासा गांव में प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर के मुख्य द्वार को तोड़कर घुसे चोर
ने अंदर के सात मंदिरों के भी ताले तोड़ दिए। चोर यहां
से 43 चांदी के छत्र, सात चांदी के सिंहासन, सात चांदी के कलश व अष्ट धातु की आठ बेशकीमती मूर्तियां
पार कर ले गए। सुबह करीब साढ़े चार बजे मंदिर का सेवक रामस्वरूप शर्मा सफाई करने आया तो
घटना का पता चला। उसने तुरंत की मंदिर के पुजारी
निहालचंद व पारस जैन को सूचना दी। इनकी सूचना पर
रानोली थानाधिकारी कमल कुमार मौके पर पहुंचे।
इसके बाद एसपी गौरव श्रीवास्तव, सीओ ग्रामीण
राकेश काछवाल भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस
अधिकारियों ने मौका मुआयना करने के बाद एमओबी
टीम को मौके पर बुलाया। इसके बाद नागौर व झुंझुनूं
से एफएसएल टीम मौके पर बुलाई गई।
टीम ने मौके से फुट प्रिंट भी उठाए। जिसमें एक ही
व्यक्ति मंदिर में प्रवेश करने की बात सामने आ रही
है। मंदिर के अंदर रखे दानपात्रों को भी खोलने की
कोशिश की गई लेकिन चोर इसमें सफल नहीं हो पाए।
घटना के बाद पुलिस ने टीम गठित कर मामले की जांच शुरू
कर दी है। टीम ने दांतारामगढ़ क्षेत्र में कई बार पकड़ में आ चुके
आरोपियों के घर भी दबिश दी। दिगंबर जैन भव्योदय अतिशय
क्षेत्र रैवासा के महामंत्री नृपेंद्र छाबड़ा ने कहा है कि पुलिस ने गिरफ्तारी करने व चोरी
हुए छत्र व मूर्तियां बरामद करने के लिए तीन दिन का समय मांगा है। 27 दिसंबर
तक आरोपी नहीं पकड़े जाने पर 28 को दंग की नसियां स्थित पाश्र्वनाथ भवन में
जिलेभर के जैन समाज के लोगों की बैठक होगी और कंचन सागर महाराज से आशीर्वाद
लेकर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसके बाद आगे के आंदोलन की
रणनीति तय की जाएगी। Source: Dainik Bhaskar
आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के
संघस्थ मुनि श्री प्रत्यक्ष सागर महाराज का समाधिमरण

सागर, November 16. 2011 (डेली हिंदी न्यूज़) : वर्णी भवन मोराजी में
वर्षाकालीन चातुर्मास कर रहे आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के संघस्थ
मुनि श्री प्रत्यक्ष सागर महाराज का आज मंगलवार को समाधिमरण हुआ।
आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य
में वर्णी भवन मोराजी से पद्मासन मुद्रा में मुनि
श्री को शोभायात्रा के रूप में अतिशय क्षेत्र
मंगलगिरी ले जाया गया। शोभायात्रा में हजारों की
संख्या में जैन धर्मावलंबियों ने भाग
लिया। जैन धर्म के अनुसार उनकी अंतिम क्रियाएं
मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। अपराह्न
वर्णी भवन मोराजी में श्रद्धांजलि सभा आयोजित
की गई। मुनि श्री के समाधिमरण के चलते
धर्मावलंबियों द्वारा अपने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे गए।
शोभायात्रा में पालकी में पद्मासन मुद्रा में
मुनिश्री को मंगलगिरी तक ले जाया गया। शोभायात्रा
में शामिल धर्मावलंबियों के नारों से आकाश
गुंजायमान हो गया। धर्मावलंबी णमोकार
महामंत्र का उच्चारण कर रहे थे।
मंगलगिरी स्थित धर्मशाला के नजदीक मुनिश्री का
समाधिमरण संपन्न हुआ। समाधिमरण के पूर्व
मंत्रोच्चार कराया गया। जैन धर्म के अनुसार
धर्मावलंबियों द्वारा समाधिमरण में श्रीफल (नारियल)
चढ़ाए गए। समाधिमरण के दौरान मुनिश्री के गृहस्थ
जीवन के परिजन उपस्थित रहे।
शोभायात्रा में नगर विधायक शैलेंद्र जैन, मप्र
महिला एवं वित्त विकास निगम की अध्यक्ष सुधा जैन,
पूर्व विधायक सुनील जैन, पूर्व विधायक कपूरचंद
घुवारा, महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती
मीनाक्षी जैन, दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष महेश
बिलहरा, संतोष घड़ी, देवेंद्र लुहारी, मुकेश
जैन ढाना, देवेंद्र जैना, चक्रेश सिंघई, पूर्व जिला
पंचायत अध्यक्ष स्वदेश जैन, अनिल नैनधरा, ऋषभ
समैया, जिनेन्द्र गौरझामर, सुरेन्द्र मालथौन, विनय
मलैया, डॉ. रमेश चंद जैन ढाना, डॉ. नरेश चंद जैन ढाना,
खेमचंद जैन ढाना, अजय देवरी, अजय सराफ, वीरेन्द्र
मालथौन, अनिल सराफ, रजनीश डीसेंट, मुकेश खमकुआ, संजय
डबडेरा, संजय टडा, राकेश निश्चय, सपन जैन, फंटूश जैन,
जयकुमार जैन फट्टा, महेन्द्र सिंघई, उमेश जैन,
वेदप्रकाश भायजी सहित बडी संख्या में बच्चे, बूढे,
महिला, पुरूष, युवक, युवतियां शामिल हुए।
खुदाई में मिली र्तीथकरों की प्रतिमाएं

सागवाड़ा/उदयपुर, August 20, 2011: .कस्बे के जूना मंदिर में
चल रहे खुदाई कार्य के दौरान शुक्रवार को मंदिर
के पीछे की ओर जैन र्तीथकरों की प्राचीन
प्रतिमाएं मिली। मजदूर जब खुदाई कर रहे थे तो यकायक
जमीन धंसी और नीचे से प्रतिमाएं नजर आने लगी।
स्थानीय जैन समाज के लोगों का कहना है कि यह
प्रतिमाएं 1650 ईस्वी पूर्व की हो सकती हैं, हालांकि
अभी इसकी काल गणना नहीं हो पाई है। मंदिर परिसर में
नेमीनाथ भगवान के लिए जिनालय का निर्माण किया
जाना है तथा इसी के लिए खुदाई का कार्य चल रहा था। सूचना मिलने पर ट्रस्ट
मंडल के पवन गोवाड़िया, बदामीलाल मेहता, केसरीमल
शाह, कीर्ति शाह, भरत शाह, प्रदीप दोसी सहित कई लोग
मंदिर पहुंचे। समाज के लोगों के अनुसार खुदाई में
करीब 15 प्रतिमाएं निकली हैं, जो भगवान महावीर
स्वामी, पार्श्वनाथ, आदिनाथ भगवान की हैं।
खुदाई में प्रतिमाएं निकलने की जानकारी
शीतलधाम एमपी में चातुर्मास रत आचार्य
योगिंद्र सागर महाराज को दी गई।
महाराज ने अगले आदेश तक प्रतिमाएं वहीं रखने के निर्देश दिए।
जूना मंदिर में मूर्तियां निकलने की जानकारी मिलने
पर निर्माण रुकवा दिया गया है।
मंदिर सागवाड़ा का सबसे पुराना जैन मंदिर है, इसी
कारण इसे जूना मंदिर कहा जाता है। करीब एक हजार वर्ष
पूर्व ईडर से आए 18 हजार दिगंबर जैन समाजियों ने
इसे बनवाया था। जूना मंदिर से मूर्तियां निकलने की
जानकारी प्रशासन को नहीं मिली है। Source: Bhaskar News
राष्ट्रपति को दी आचार्य विद्यासागर की पुस्तक 'द साइलेंट अर्थ'
नई दिल्ली, June 16, 2011 : राष्ट्रपति भवन में
आयोजित सादगी भरे एक समारोह में कल राष्ट्रपति
प्रतिभा पाटिल को तपस्वी दार्शनिक संत आचार्य
विद्यासागर द्वारा लिखित कालजयी हिन्दी महाकाव्य
मूकमाटी के अंग्रेजी रपातंरण 'द साइलेंट अर्थ'
की प्रथम प्रति भेंट की गयी। राष्ट्रपति भवन उस
समय तालियों से गूंज उठा जब राष्ट्रपति ने वहां
एकत्रित श्रध्दालुओं का जैन अभिवादन परपंरा जय
जितेन्द्र से किया। इस अवसर पर बड़ी तादाद में
श्रध्दालु तथा साधु उपस्थित थे। पुस्तक की
प्रथम प्रति सर्वश्री अशोक पाटनी, अभिनंदन जैन तथा एनके जैन ने भेंट की।
इस अवसर पर राष्ट्रपति का स्वागत करते हुये
फिल्मकार अनुपमा जैन ने कहा कि आचार्य श्री के
प्रत्यक्ष आभामंडल राष्ट्रपति भवन में
साक्षात अवतरित हुआ है और
इस आलोक में देश की प्रथम
नागरिक को आचार्य श्री की
पुस्तक भेंट की जा रही है।
उन्होंने कहा कि आचार्य
श्री का जीवन सत्य, कल्याण
से जन कल्याण की यात्रा है।
घोर तपस्या, चिन्तन मनन के
साथ -साथ वह एक प्रबुध्द
तथा संवेदनशील दार्शनिक
लेखक हैं। यह आचार्य श्री
की संवेदनशीलता है कि
उन्होंने माटी जैसी पद
दलित एवं व्यथित वस्तु को
महाकाव्य का विषय बना कर
उसकी मूक वेदना और मुक्ति
की आंकक्षा को वाणी दी।
उन्होंने कहा कि दरअसल यह
महाकाव्य स्वयं को और अपने
भविष्य को समझने की नयी
दृष्टि देता है और दलितों
और शोषितों को उत्थान की आस
देता है कि कुंभकार किस तरह
मिट्टी को शुध्द बना कर उसे
मंदिर का पवित्र कलश बनाने
की क्षमता रखता है। सुश्री
जैन ने कहा कि यह महाकाव्य
कर्म के बंधनों से आत्मा की
भक्ति यात्रा तमाम
विकृतियां मिटाकर प्रभु
से एकाकार होने की यात्रा
पर्व है।
पुस्तक अंग्रेजी, बंगला,
मराठी, कन्नड़ में अनुदित हो
चुकी है तथा लगभग 40
शोधकर्ता इस पर पीएचडी कर
रहे हैं। उन्होंने कहा कि
आचार्य श्री का जीवन स्वयं
ही दर्शन है। उनका कहना है
अहिंसा कायर नहीं कर्तव्य
निष्ठा बनाती है। राजनीति
जब धर्म से जुड़ जाती है तो
साधना हो जाती है। जीवन एक
केन्वास है यह हम पर है हम
उसमें कैसा रंग भरे।
उन्होंने कहा कि गुरूवर आज
के दौर के विल्क्षण संत
हैं। उनका तप अप्रतिम है।
कठोर दिगंबर जैन चर्या का
पालन करते हुए बीसियों
सालों से न नमक खाया, न
चीनी। हजारों किमी की नंगे
पांव यात्रा करते हुए जंगल
जंगल भटके। कठोर तपस्या, जन
कल्याण, स्वास्थ्य मनन,
चिंतन के साथ सतत लेखन
अदभुत है। उनके संघ में
अधिकतर उच्च शिक्षा
प्राप्त एमएबीएमटेक,
मेडिकोज एम बी ए तथा
उच्चाधिकारी शामिल हैं जो
संसारिक सुख त्याग कठिन तप
साधना में रत हैं। आचार्य
लगभग एक दर्जन से अधिक
आध्यात्मिक व साहित्यक
ग्रंथ लिख चुके हैं जिनका
संस्कृत, अंग्रेजी, हिंदी
में अनुवाद हो चुका है।
Source: www.deshbandhu.co.in
यूपी सरकार द्वारा जैनमुनि को जबरन धरने से उठाने पर जैन समाज ने जताया विरोध
May 21, 2011: यूपी सरकार द्वारा 9 यांत्रिक बूचडख़ानों को दी गई अनुमति के विरोध में
आमरण अनशन पर बैठे जैनमुनि मैत्री प्रभ सागर महाराज एवं उनके
समर्थकों को जबरन उठाकर अस्पताल में भर्ती कराने से गुस्साए जैन समाज
के लोगों ने गुरुवार को देशव्यापी धरने प्रदर्शनों के माध्यम से यूपी
सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जता कर प्रदर्शन किया।
इसी क्रम में गुरुवार को कस्बे के दिगंबर जैन समाज के लोगों द्वारा मौन जुलूस
निकालकर विरोध जताया गया। कस्बे के दिगंबर जैन मंदिर से शुरू
हुआ ये जुलूस कस्बे के प्रमुख मार्गों से होता हुआ पुन:: मंदिर
पहुंचकर समाप्त हुआ। इसके बाद इन लोगो ने राष्ट्रपति एवं
प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन की प्रति एसडीएम चंदगीराम झांझरिया
को सौंपी। इस दौरान जैन समाज अध्यक्ष राजेंद्र कासलीवाल, पवन
बाकलीवाल, नरेंद्र पाटनी, पदम चंद टोंच्या , प्रकाशचंद
हल्दानिया, पूरण चंद जैन, प्रेमचंद कासलीवाल, प्रकाशचंद बाकलीवाल,
मोहनलाल जैन, सुरेश भौंच, राकेश बोहरा, राजेंद्र भौंच, देवेश जैन, महिला
मंडल अध्यक्ष बबीता भौंच, मीनाक्षी जैन, इंद्रा पाटनी, भगवान
महावीर फाउंडेशन की प्रदेशाध्यक्ष मंजूलता जैन, इंदू बूचरा,
संगीता पाटनी सहित बांसखोह, कानोता, दनाऊ व तूंगा सहित
आसपास के गांवों से जैन समाज के लोग शामिल हुए।
भगवान महावीर फाउंडेशन के प्रदेशाध्यक्ष मंजूलता जैन के अनुसार ये बात
जगजाहिर है कि जैन मुनि ना तो वाहन आदि में गमन करते है न ही वे रात्रि
में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते है। ऐसे में यूपी पुलिस
द्वारा मायावती सरकार के इशारे पर जैनमुनि मैत्री
प्रभ सागर महाराज एवं उनके समर्थकों को रात में जबरन गाड़ी में
डालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया जो जैनमुनि चार्य एवं जैन
धर्म का अपमान है। यूपी सरकार के इस कृत्य के विरोध
में गुरुवार को जैन समाज के लोगो द्वारा देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन किया गया।
जैन समाज द्वारा जताए गए विरोध प्रदर्शन को भगवान महावीर फाउंडेशन,
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंगदल, युवा चेतना मंच, सामाजिक युवा
संगठन संस्थान, जन जाग्रति संघ, नवजीवन सेवा संस्थान, आदिवासी
मीणा सेवा संघ, अखिल भारतीय मीणा सेवा संघ सहित विभिन्न
संगठनों ने अपना समर्थन दिया। Source: Dainik Bhaskar
कुंडलपुर में भगवान महावीर जयंती का बडा आयोजन
बिहारशरीफ , April 17, 2011। भगवान महावीर के जन्म
स्थान कुंडलपुरमें हर वर्ष बडी संख्या में
श्रद्धालुओं का आगमन होता है। बिहार सरकार ने महावीर
स्वामी के जन्मोत्सव 16 अप्रैल को राजकीय स्तर पर
मनाने का फैसला किया था। पर्यटन विभाग, कला
संस्कृति एवं युवा विभाग तथा जिला प्रशासन ने बडा
आयोजन करने की तैयारियां की । नालंदा जिला मुख्यालय
बिहार शरीफ से करीब सात किलोमीटर दूर कुंडलपुरमें
599ई पूर्व में भगवान महावीर का जन्म वैशाली के
क्षत्रिय परिवार में सिद्र्धाथ और माता त्रिशला के घर हुआ था जबकि
नालंदा जिले के पावापुरीमें 527ई पूर्व भगवान महावीर ने निवार्ण ग्रहण किया था।
जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी आर्यिकाशिरोमणि
ज्ञानमतिमाताजी की प्रेरणा से उनके शिष्य
कार्यक्रम को श्रद्धाभक्तिभाव से आयोजित करते हैं।
कुंडलपुर जयंती समारोह आयोजन कार्यक्रम के
प्रबंध सिमतिके मंत्री विजय कुमार जैन ने बताया कि
भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव
महामस्तकाभिषेक एवं शोभायात्रा आकषर्ण का केंद्र था।
इस अवसर पर गुजरात से आए कलाकार गरबा एवं डांडिया
नृत्य, भोजपुरी लोकगीत की प्रस्तुति एवं भगवान
महावीर से संबंधित नृत्य नाटिका इस आयोजन का प्रमुख
आकर्षण था। भगवान महावीर स्वामी के जन्म स्थल
कुंडलपुरमें जयंती समारोह में भाग लेने के लिए देश-
विदेश के हजारों जैन श्रद्धालु महापुरुष को
श्रद्धा-भक्ति का अर्ध्यसमर्पित करने आए । समारोह का
उद्घाटन बिहार विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने किया ।
कल्याणकारी द्वय दिगम्बर जैनेश्वरी दीक्षाएं
Delhi, March 17, 2011: जैन समाज में
पूज्य पञ्च परमेष्ठी होते है जिनकी आराधना जैन
अनुयायी करते हैं.ऐसे ही पूज्य श्वेतपिच्छाचार्य
श्री विद्यानंद जी मुनिराज ससंघ के पावन सानिध्य व पूज्य एलाचार्य
श्री वसुनंदी जी मुनिराज के पावन कर कमलों द्वारा भव्य कल्याणकारी द्वय
दिगम्बर जैनेश्वरी दीक्षाएं ०१ अप्रैल को कमल सिनेमा पार्क,ग्रीन पार्क
दिल्ली में सुबह ८ बजे से १० बजे के दौरान समारोह के मध्य पूज्य ऐलक श्री
ज्ञानानंद जी एवं ऐलक श्री सर्वानन्द जी महाराज को प्रदान की जाएगी.दोनों ही
ऐलक जी महाराज की एक साथ क्षुल्लक दीक्षा १२ दिसम्बर २००७ को
राजाखेड़ा में हुई पश्चात् दोनों की ऐलक दीक्षा ५ मई २००९ को सरधना
में हुई और अब दोनों ही महाराज की एक साथ मुनि
दीक्षा ०१ अप्रैल २०११ को दिल्ली में होना निश्चित हुआ है.इस सुअवसर पर पूज्य आचार्य श्री विद्यानंद जी
मुनिराज व एलाचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के साथ साथ उपाध्याय प्रज्ञ सागर जी,आर्यिका श्री विद्याश्री व विधाश्री
माताजी,ऐलक श्री विज्ञान सागर जी,विमुक्त सागरजी,क्षुल्लक श्री विशंक सागरजी,विभंजन
सागरजी,सुखानंद जी आदि साधू संतो के दर्शन प्राप्त हो सकते हैं. Ankit Jain
<ankit.jain13@yahoo.com>
श्री श्रीपार्श्वनाथ जिन बिम्ब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव
कोलकत्ता, फरवरी 10, 2011: कोलकत्ता में फरवरी 10, 2011 से
फरवरी 16, 2011 तक श्री श्रीपार्श्वनाथ जिन बिम्ब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा
महोत्सव आचार्यो व मुनियों के सान्निध्य में सपन्न हो रहा है|
जिन बिम्ब पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव,
कोलकत्ता के गुलमोहर पार्क में सपन्न होरहा है| कार्यक्रम:
10 फरवरी, 2011 - ध्वजा रोहण
11 फरवरी, 2011 - गर्भकल्याणक
12 फरवरी, 2011 - गर्भकल्याणक
13 फरवरी, 2011 - जन्मकल्याणक
14 फरवरी, 2011 -दीक्षाकल्याणक
15 फरवरी, 2011 -केवलज्ञानकल्याणक
16 फरवरी, 2011 -मोक्षकल्याणक, कलशरोहण, प्रतिमा विराजमान
पुष्पगिरि
तीर्थ पंचकल्याणक महोत्सव
की शुरुआत

देवास, January 23, 2011:
पुष्पगिरि पहाड़ी पर
रविवार सुबह 10.50 बजे संतों
के सान्निध्य में
ध्वजारोहण के साथ
पंचकल्याणक महोत्सव की
शुरुआत हुई। आचार्यो व
मुनियों के सान्निध्य में
दक्षिण भारत से आए पंडितों
के मंत्रोच्चर से
पुष्पगिरि तीर्थ गुंज
उठा। महोत्सव की शुरुआत
में घटयात्रा निकाली गई।
सुबह साढ़े पांच बजे से ही
पुष्पगिरि तीर्थ पर
श्रद्धालुओं का पहुंचना
शुरू हो गया था। सुबह साढ़े
पांच से 6.15 बजे तक
प्रतिक्रमण हुआ जिसमें
आचार्य पुष्पदंत सागरजी
महाराज, आचार्य
गुप्तीनंदजी व आचार्य
कुमुदनंदजी के सान्निध्य
में 40 मुनि, आर्यिका, ऐलक,
क्षुल्लक व ब्रrाचारी ने
प्रतिक्रमण किया। इसके
बाद जिनाराधना,
गुर्वाज्ञा आचार्य
निमंत्रण हुआ।
सुबह करीब 10 बजे पदमप्रभु
दिगंबर जैन मंदिर से
घटयात्रा शुरू हुई। इसमें 9
विभिन्न अलंकारों से सजे
हाथियों पर यजमान इंद्र-इंद्राणी
के रूप में विराजित थे।
पीछे महिलाएं सिर पर कलश
रखकर चल रही थीं। उनके पीछे
पुष्पगिरि दिग्विजय
यात्रा रथ था।
इस बीच प्रतिष्ठाचार्य
अजीत शास्त्री एवं
सहयोगियों के मार्गदर्शन
में पुष्पगिरि पहाडी के
मध्य में ध्वजारोहण पूजन
हुआ। इस दौरान एक तरफ से
घटयात्रा का प्रवेश और
दूसरी तरफ से आचार्य
पुष्पदंत सागरजी के साथ
श्रीसंघ का आगमन हुआ। इसके
साथ पूरी पहाड़ी ऊर्जा से
भर गई और जयघोष गूंजने लगे।
भोपाल के प्रदीप जैन ने सभी
आचार्यो व मुनियों के
सान्निध्य व हजारों लोगों
की उपस्थिति में 10.50 मिनट पर
ध्वजारोहण किया। इसके साथ
दक्षिण भारतीय वाद्य
यंत्रों की स्वर लहरियों
के बीच मंत्रोच्चर गुंज रहे थे।
ध्वजा रोहण बाद 11.50 बजे सभा
पंडाल का आचार्यश्री ने
मुनिसंघ की उपस्थिती में
शुद्धिकरण कर फीता काटकर
उद्घाटन किया। मुख्य
अतिथि के रूप में सांसद
सज्जनसिंह वर्मा उपसिथत
रहे। इसके बाद आचार्य श्री
पुष्पदंतसागर जी महाराज
ने धर्मसभा को संबोधित
किया। दोपहर में सकलीकरण
इंद्र प्रतिष्ठा,जाप्यारंभ,याग
मंडल,पूजा विधा,शेष याग
मंडल विधान हुए। शाम को
आरती-भक्ति, शास्त्र सभा
हुई। रात में संजय महाजन
एंड पार्टी ने भजनों की
मनमोहक प्रस्तुति दी।
Source: Dainik Bhaskar
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